प्रदोष व्रत 2026: संपूर्ण कैलेंडर, पूजा मुहूर्त, सातों प्रदोष की सूची और व्रत कथा

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प्रदोष व्रत 2026: संपूर्ण कैलेंडर, पूजा मुहूर्त, सातों प्रदोष…

प्रदोष व्रत 2026 भगवान शिव पूजा कैलेंडर

प्रदोष व्रत 2026: संपूर्ण कैलेंडर, पूजा मुहूर्त, सातों प्रदोष की सूची और व्रत कथा

शनि, सोम और अधिक प्रदोष सहित 2026 का विस्तृत मार्गदर्शक

त्वरित तथ्य (Quick Facts): प्रदोष व्रत 2026

  • कुल प्रदोष व्रत: 24
  • पहला प्रदोष: 1 जनवरी (गुरु प्रदोष)
  • अंतिम प्रदोष: 21 दिसंबर (सोम प्रदोष)
  • शनि प्रदोष की संख्या: 2 (14 फरवरी और 27 जून)
  • सोम प्रदोष की संख्या: 4
  • मुख्य आराध्य: भगवान शिव और माता पार्वती (नंदी जी के साथ)
  • पूजा का सर्वोत्तम समय: प्रदोष काल (सूर्यास्त के आसपास का डेढ़ घंटा)

विषय-सूची (Table of Contents):

1. प्रदोष व्रत क्या है?

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत (Pradosham) भगवान शिव को समर्पित सबसे शक्तिशाली उपवासों में से एक है। शिव पुराण के अनुसार, चंद्रमा के हर 15 दिन के चक्र (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष) की 13वीं तिथि को त्रयोदशी कहते हैं। इसी त्रयोदशी के दिन को प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाता है।

प्रदोष शब्द का शाब्दिक अर्थ है ‘दोषों या पापों का नाश करने वाला’। यह व्रत जीवन की नकारात्मक ऊर्जाओं, पूर्व जन्मों के बुरे कर्मों (पापों) को नष्ट कर जीवन में सुख, शांति और मोक्ष प्रदान करता है। इस दिन महादेव और माता पार्वती प्रसन्न मुद्रा में कैलाश पर्वत पर अपने वाहन नंदी के साथ विहार करते हैं।

2. प्रदोष व्रत क्यों मनाया जाता है?

प्रदोष व्रत के पालन के पीछे अनेक आध्यात्मिक रहस्य हैं:

  • प्रदोष काल का महत्व: सूर्यास्त के समय जब दिन और रात का मिलन होता है, उस संध्या काल को ‘प्रदोष काल’ कहते हैं। माना जाता है कि इस समय ब्रह्मांड में आध्यात्मिक ऊर्जा अपने चरम पर होती है और शिव जी इसी समय आनंदित होकर तांडव नृत्य करते हैं।
  • नंदी जी की विशेष पूजा: इस दिन शिव जी के परम भक्त नंदी (बैल) की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि नंदी के कानों में अपनी मनोकामना कहने से वह सीधे महादेव तक पहुंच जाती है।
  • त्रयोदशी का रहस्य: 13 का अंक वैदिक प्रणाली में शिव से जुड़ा है, जो सृजन और विनाश (परिवर्तन) का प्रतीक है।

3. प्रदोष व्रत 2026 संपूर्ण कैलेंडर (महीनेवार)

नीचे वर्ष 2026 की सभी 24 प्रदोष तिथियों का विवरण है। किसी विशिष्ट महीने पर जाने के लिए नीचे दिए गए नेविगेशन का उपयोग करें:

जनवरी 2026
1 जनवरी (गुरुवार)
गुरु प्रदोष
⏰ 06:05 PM – 08:36 PM
16 जनवरी (शुक्रवार)
शुक्र प्रदोष
⏰ 06:13 PM – 08:44 PM
30 जनवरी (शुक्रवार)
शुक्र प्रदोष
⏰ 06:20 PM – 08:49 PM
फ़रवरी 2026
14 फ़रवरी (शनिवार)
शनि प्रदोष (Shani)
⏰ 06:25 PM – 08:53 PM
मार्च 2026
1 मार्च (रविवार)
रवि प्रदोष
⏰ 06:28 PM – 07:09 PM
16 मार्च (सोमवार)
सोम प्रदोष
⏰ 06:30 PM – 08:53 PM
30 मार्च (सोमवार)
सोम प्रदोष
⏰ 06:31 PM – 08:52 PM
अप्रैल 2026
15 अप्रैल (बुधवार)
बुध प्रदोष
⏰ 06:32 PM – 08:51 PM
28 अप्रैल (मंगलवार)
भौम प्रदोष
⏰ 06:51 PM – 08:51 PM
मई 2026
14 मई (गुरुवार)
गुरु प्रदोष
⏰ 06:38 PM – 08:53 PM
28 मई (गुरुवार)
अधिक गुरु प्रदोष
⏰ 06:41 PM – 08:56 PM
जून 2026
12 जून (शुक्रवार)
अधिक शुक्र प्रदोष
⏰ 07:36 PM – 08:59 PM
27 जून (शनिवार)
शनि प्रदोष (Shani)
⏰ 06:49 PM – 09:03 PM
जुलाई 2026
12 जुलाई (रविवार)
रवि प्रदोष
⏰ 06:50 PM – 09:04 PM
26 जुलाई (रविवार)
रवि प्रदोष
⏰ 06:48 PM – 09:04 PM
अगस्त 2026
10 अगस्त (सोमवार)
सोम प्रदोष
⏰ 06:43 PM – 09:00 PM
25 अगस्त (मंगलवार)
भौम प्रदोष
⏰ 06:35 PM – 08:54 PM
सितंबर 2026
8 सितंबर (मंगलवार)
भौम प्रदोष
⏰ 06:26 PM – 08:46 PM
24 सितंबर (गुरुवार)
गुरु प्रदोष
⏰ 06:14 PM – 08:37 PM
अक्टूबर 2026
8 अक्टूबर (गुरुवार)
गुरु प्रदोष
⏰ 06:05 PM – 08:30 PM
23 अक्टूबर (शुक्रवार)
शुक्र प्रदोष
⏰ 05:57 PM – 08:24 PM
नवंबर 2026
6 नवंबर (शुक्रवार)
शुक्र प्रदोष
⏰ 05:52 PM – 08:20 PM
22 नवंबर (रविवार)
रवि प्रदोष
⏰ 05:50 PM – 08:20 PM
दिसंबर 2026
6 दिसंबर (रविवार)
रवि प्रदोष
⏰ 05:53 PM – 08:24 PM
21 दिसंबर (सोमवार)
सोम प्रदोष
⏰ 05:59 PM – 08:30 PM

4. प्रदोष व्रत कथा: समुद्र मंथन और हलाहल विष

प्रदोष व्रत का आरंभ समुद्र मंथन (Samudra Manthan) की पौराणिक कथा से जुड़ा है। स्कंद पुराण के अनुसार, जब देवों और असुरों ने मिलकर क्षीर सागर का मंथन किया, तो उसमें से चौदह रत्न निकले। लेकिन अमृत से पूर्व समुद्र में से ‘हलाहल’ (कालकूट विष) निकला। इस विष की ज्वाला इतनी भयंकर थी कि तीनों लोक जलने लगे और सभी देवी-देवता त्राहि-त्राहि करने लगे।

सृष्टि की रक्षा के लिए सभी देव भगवान शिव की शरण में गए। उस समय त्रयोदशी तिथि का प्रदोष काल चल रहा था। महादेव ने बिना किसी संकोच के उस भयंकर विष को अपने कंठ (गले) में धारण कर लिया। विष के प्रभाव से शिव जी का कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। भगवान शिव द्वारा त्रयोदशी की संध्या पर यह महाबलिदान देने के कारण, देवताओं ने नंदी के साथ शिव जी की स्तुति की। इसी दिन से यह मान्यता है कि जो भी व्यक्ति त्रयोदशी के दिन प्रदोष काल में शिव जी की पूजा करेगा, शिव जी उसके जीवन के सभी ‘विष’ (संकट और पाप) पी लेंगे।

5. आपको कौन सा प्रदोष व्रत करना चाहिए?

अपनी विशिष्ट मनोकामना के अनुसार सही दिन का प्रदोष व्रत चुनना अत्यधिक लाभकारी होता है:

6. सातों दिनों के प्रदोष व्रत का फल (Comparison Table)

प्रदोष का प्रकार संबद्ध ग्रह मुख्य लाभ (Benefit)
रवि प्रदोष (रविवार) सूर्य (Sun) उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और समाज में मान-सम्मान
सोम प्रदोष (सोमवार) चंद्रमा (Moon) मानसिक शांति, तनाव से मुक्ति और इच्छाओं की पूर्ति
भौम प्रदोष (मंगलवार) मंगल (Mars) कर्ज से मुक्ति (ऋण मुक्ति) और भूमि विवाद सुलझना
बुध प्रदोष (बुधवार) बुध (Mercury) विद्या, एकाग्रता और व्यापारिक सफलता
गुरु प्रदोष (गुरुवार) बृहस्पति (Jupiter) आध्यात्मिक ज्ञान, करियर में सफलता और शत्रुओं पर विजय
शुक्र प्रदोष (शुक्रवार) शुक्र (Venus) प्रेम, वैवाहिक मधुरता, संतान सुख और ऐश्वर्य
शनि प्रदोष (शनिवार) शनि (Saturn) कर्म दोषों का नाश, साढ़ेसाती से राहत और नौकरी में तरक्की

7. पूजन सामग्री सूची (Puja Samagri)

शिव जी की पूजा बहुत सरल सामग्रियों से भी संपन्न हो जाती है। प्रदोष व्रत के लिए निम्नलिखित चीजें आवश्यक हैं:

  • शुद्ध जल / गंगाजल
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • ताजे और अखंडित बेलपत्र (11, 21 या 51)
  • धतूरा, भांग और सफेद पुष्प
  • चंदन, भस्म या भभूति
  • कपूर, धूप, और गाय के घी का दीपक
  • मिठाई या ऋतु फल (प्रसाद के लिए)

8. प्रदोष काल पूजा विधि (Puja Vidhi)

  1. प्रातः काल संकल्प: सूर्योदय से पूर्व उठें। स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और महादेव का ध्यान कर दिनभर उपवास रखने का संकल्प लें।
  2. प्रदोष काल की तैयारी: सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले पुनः स्नान करें या हाथ-मुंह धोकर शुद्ध हों।
  3. शिवलिंग का अभिषेक: पूजा स्थान पर उत्तराभिमुख होकर बैठें। शिवलिंग पर पंचामृत से रुद्राभिषेक करें। फिर शुद्ध गंगाजल अर्पित करें।
  4. श्रृंगार और अर्पण: शिवलिंग पर भस्म/चंदन का त्रिपुंड बनाएं। शिव जी को बेलपत्र, फूल, धतूरा अर्पित करें। नंदी जी को स्नान कराकर उन्हें भी फूल चढ़ाएं।
  5. मंत्र जाप और आरती: “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जाप करें। अंत में कपूर से आरती करें और अनजाने में हुई भूल की क्षमा मांगें।

9. व्रत के नियम और पारण विधि (Fasting Rules)

व्रत में क्या खाएं:

  • यदि आप निराहार व्रत नहीं कर सकते, तो फलाहार ले सकते हैं।
  • फल, दूध, मेवे, मखाने, साबूदाना और कुट्टू के आटे से बने व्यंजन।
  • सादे नमक की जगह सेंधा नमक (Rock salt) का ही उपयोग करें।

क्या न खाएं:

  • अनाज (चावल, गेहूं, दालें)।
  • लहसुन, प्याज, मांसाहार या तामसिक भोजन।

पारण (उपवास तोड़ना):
प्रदोष व्रत का पारण शाम को प्रदोष काल की पूजा के बाद किया जाता है। आरती और शिव जी को भोग लगाने के बाद वही प्रसाद ग्रहण करके अपना उपवास खोलें।

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10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. प्रदोष व्रत क्या है?

प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पावन उपवास है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी (13वीं तिथि) को रखा जाता है।

2. 2026 में कुल कितने प्रदोष व्रत हैं?

वर्ष 2026 में कुल 24 प्रदोष व्रत हैं। साल का पहला प्रदोष 1 जनवरी को और अंतिम 21 दिसंबर को है।

3. क्या महिलाएं प्रदोष व्रत रख सकती हैं?

हाँ, महिलाएं सुखद वैवाहिक जीवन, संतान प्राप्ति और घर की सुख-शांति के लिए पूर्ण श्रद्धा के साथ यह व्रत रखती हैं।

4. प्रदोष काल क्या होता है?

सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक के समय को ‘प्रदोष काल’ कहा जाता है। शिव पूजा के लिए यह समय सबसे उत्तम है।

5. क्या बिना उपवास के प्रदोष व्रत कर सकते हैं?

यदि स्वास्थ्य अनुमति न दे, तो आप केवल सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज) ग्रहण कर सकते हैं और शाम को प्रदोष काल में शिव जी की पूजा कर सकते हैं।

6. शनि और सोम प्रदोष में क्या अंतर है?

शनिवार को पड़ने वाला शनि प्रदोष करियर और कर्म दोषों से मुक्ति दिलाता है, जबकि सोमवार का सोम प्रदोष मानसिक शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति करता है।

7. क्या व्रत के दौरान चाय पी सकते हैं?

हां, फलाहारी उपवास के दौरान दूध की चाय पी जा सकती है। हालांकि, पूर्ण निराहार (बिना जल-अन्न) व्रत में इसकी मनाही है।

8. प्रदोष व्रत में कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

इस दिन शिव पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप करना सर्वाधिक शक्तिशाली माना जाता है।

9. साल का सबसे शक्तिशाली प्रदोष कौन सा है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ‘शनि प्रदोष’ और ‘सोम प्रदोष’ को सबसे अधिक शक्तिशाली और तुरंत फल देने वाला माना जाता है।

10. क्या प्रदोष व्रत नवग्रह दोष दूर कर सकता है?

हां, भगवान शिव नवग्रहों के अधिपति हैं। प्रदोष के दिन शिव पूजा करने से सभी नवग्रहों के नकारात्मक प्रभाव स्वतः ही शांत हो जाते हैं।

प्रामाणिक संदर्भ (Sources)

  • शिव पुराण: समुद्र मंथन, हलाहल विषपान और त्रयोदशी पूजा का महात्म्य।
  • स्कंद पुराण: प्रदोष व्रत की महिमा और अलग-अलग वारों के प्रदोष का महत्व।
  • द्रिक पंचांग (Drik Panchang): 2026 की सटीक त्रयोदशी तिथियों और प्रदोष काल (सूर्यास्त) की गणितीय गणनाओं के लिए।

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Nishchay Chaturvedi