मार्गशीर्ष गुरुवार पूजा 2026: तिथियां, विधि, व्रत कथा और…

मार्गशीर्ष गुरुवार पूजा 2026: तिथियां, विधि और महत्व
मार्गशीर्ष गुरुवार व्रत (महालक्ष्मी व्रत) हिंदू धर्म में धन और समृद्धि के लिए सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है। भक्त अपनी आर्थिक समस्याओं को दूर करने और देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने के लिए इस पवित्र महीने के हर गुरुवार को यह व्रत रखते हैं।
विवाहित महिलाएं सुखी दांपत्य जीवन के लिए और कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं। SmartPuja के साथ आप इस पूजा को पूर्ण वैदिक विधि से संपन्न कर सकते हैं।
📅 मार्गशीर्ष गुरुवार 2026 की तिथियां
वर्ष 2026 में मार्गशीर्ष का महीना 10 दिसंबर 2026 से शुरू होकर 7 जनवरी 2027 तक रहेगा। इस दौरान 5 गुरुवार आएंगे:
10 दिसंबर 2026
17 दिसंबर 2026
24 दिसंबर 2026
31 दिसंबर 2026
7 जनवरी 2027
मार्गशीर्ष गुरुवार पूजा का महत्व
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, स्वयं भगवान कृष्ण ने कहा है कि “महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूं।” यह महीना भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी दोनों को अत्यंत प्रिय है।
इस माह में गुरुवार को लक्ष्मी पूजा करने से:
- आर्थिक संकट दूर होते हैं और धन की वर्षा होती है।
- परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
- संतान सुख की प्राप्ति होती है।
- कुंवारी कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी मिलता है।
पूजा सामग्री सूची
पूजा शुरू करने से पहले ये सामग्री एकत्रित कर लें:
मार्गशीर्ष गुरुवार पूजा विधि (Step-by-Step)
- स्थापना: सुबह स्नान करके पूजा स्थान को साफ करें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और चावल की ढेरी पर कलश स्थापित करें।
- कलश सजावट: कलश में पानी, सिक्का, सुपारी और दूर्वा डालें। उस पर 5 आम के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें।
- देवी आवाहन: महालक्ष्मी की मूर्ति या फोटो को कलश के पास रखें। उन्हें हल्दी, कुमकुम और फूलों से सजाएं।
- पूजा: “ओम महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें। देवी को फल, फूल और विशेष रूप से 5 प्रकार के फल अर्पित करें।
- भोग: घर में बनी मिठाई, खीर या दूध का भोग लगाएं। गाय को भी भोग का एक हिस्सा खिलाना शुभ होता है।
- कथा और आरती: महालक्ष्मी व्रत कथा पढ़ें या सुनें। अंत में कपूर से आरती करें और प्रसाद बांटें।
🪔 महालक्ष्मी मंत्र
नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
शंखचक्र गदाहस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते॥
“श्री पीठ पर स्थित और देवताओं द्वारा पूजित होने वाली हे महामाया, आपको नमस्कार है। हाथ में शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली हे महालक्ष्मी, आपको प्रणाम है।”
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