वट सावित्री व्रत 2026: सही तिथि, शुभ मुहूर्त और…

वट सावित्री व्रत 2026: सही तिथि, शुभ मुहूर्त और अखंड सौभाग्य की पूजा विधि
वट सावित्री व्रत भारतीय सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक है। यह व्रत पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए रखा जाता है। यह दिन सती सावित्री की अटूट भक्ति का प्रतीक है, जिन्होंने अपनी दृढ़ता और बुद्धिमत्ता से यमराज (मृत्यु के देवता) से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे।
इस पर्व में वट वृक्ष (बरगद के पेड़) की पूजा की जाती है, जिसमें त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है। भारत में इसे दो बार मनाया जाता है: वट सावित्री व्रत अमावस्या (उत्तर भारत में) और वट सावित्री व्रत पूर्णिमा (महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में)।
यह गाइड हमारी हिंदू कैलेंडर 2026 श्रृंखला का हिस्सा है।
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वट सावित्री व्रत 2026: सही तिथियां
यह त्योहार ज्येष्ठ माह की अमावस्या और पूर्णिमा को मनाया जाता है। 2026 में इसकी तिथियां इस प्रकार हैं:
1. वट सावित्री अमावस्या 2026
(उत्तर भारत: यूपी, बिहार, पंजाब, दिल्ली में प्रचलित)
- तारीख: 14 जून 2026 (रविवार)
- अमावस्या तिथि शुरू: 13 जून को रात 09:42 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 14 जून को शाम 06:15 बजे
2. वट पूर्णिमा व्रत 2026
(महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में प्रचलित)
- तारीख: 29 जून 2026 (सोमवार)
- पूर्णिमा तिथि शुरू: 28 जून को सुबह 08:35 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 29 जून को सुबह 06:48 बजे
*नोट: समय नई दिल्ली IST पर आधारित है। सटीक मुहूर्त के लिए अपने स्थानीय पंचांग या स्मार्टपूजा पंडित से परामर्श करें।
वट सावित्री पूजा का शुभ मुहूर्त
पारंपरिक रूप से यह पूजा सुबह या प्रदोष काल में की जाती है। वट सावित्री पूजा के लिए सबसे शुभ समय सूर्योदय के बाद प्रातःकाल का माना जाता है।
- अमावस्या पूजा मुहूर्त: 14 जून (रविवार) की सुबह।
- पूर्णिमा पूजा मुहूर्त: 29 जून (सोमवार) की सुबह।
📍 दिल्ली, मुंबई और बैंगलोर में वट सावित्री व्रत 2026
भारत के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर, पुणे और हैदराबाद में व्रत की तारीखें समान रहेंगी। हालाँकि, सूर्योदय या चंद्रोदय के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
वट सावित्री व्रत का महत्व
वट वृक्ष (बरगद का पेड़) अपनी विशाल और फैलती हुई शाखाओं के कारण अमरता और दीर्घायु का प्रतीक है। महिलाएं इस पवित्र वृक्ष की पूजा करके अपने पति के जीवन के लिए भी ऐसी ही दीर्घायु की कामना करती हैं।
सावित्री की कथा: व्रत कथा सावित्री की कहानी सुनाती है, जो एक पतिव्रता नारी थीं। उन्होंने अपनी बुद्धि और तप से यमराज को विवश कर दिया और अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले आईं। यह दिन पत्नी की शक्ति और भक्ति (पतिव्रता धर्म) का उत्सव है।
सावित्री की भक्ति को नमन करें, वैदिक विधि से पूजा संपन्न करें।
व्रत रखने के लाभ
- पति की दीर्घायु: इसका मुख्य लाभ जीवनसाथी की लंबी उम्र और स्वास्थ्य है।
- वैवाहिक सुख: यह दांपत्य जीवन की बाधाओं को दूर करता है और रिश्ता मजबूत करता है।
- दैवीय आशीर्वाद: वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होने के कारण तीनों का आशीर्वाद मिलता है।
- संतान सुख: ऐसा माना जाता है कि यह व्रत संतान की समृद्धि और कल्याण भी लाता है।
वट सावित्री व्रत पूजा विधि
- तैयारी: सुबह जल्दी उठें, पवित्र स्नान करें और नए पारंपरिक वस्त्र (सोलह श्रृंगार) पहनें। व्रत का संकल्प लें।
- वृक्ष पूजा: पास के बरगद के पेड़ पर जाएं या घर पर गमले में उसकी टहनी लगाएं। पेड़ को जल, हल्दी, कुमकुम और फूल अर्पित करें।
- रक्षा सूत्र: पेड़ के तने के चारों ओर 7 या 108 बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत (सफेद या लाल धागा) लपेटें। यह सुरक्षा के बंधन का प्रतीक है।
- भोग: भीगा हुआ चना, फल (विशेषकर आम और खरबूजा), मिठाई और पूरियां अर्पित करें।
- कथा और आरती: पंडित जी या घर की किसी बुजुर्ग महिला से सत्यवान-सावित्री कथा सुनें। अंत में आरती करें।
- व्रत खोलना: पूजा के बाद, भीगे हुए चने और पानी का सेवन करके व्रत खोलें। बड़ों और पति का आशीर्वाद लें।
वट सावित्री व्रत पूजा सामग्री लिस्ट
सुनिश्चित करें कि आपके पास निम्नलिखित सामग्री तैयार है:
| सावित्री-सत्यवान की मूर्ति/फोटो | बरगद के पेड़ की टहनी/गमला | भीगा हुआ काला चना |
| सफेद/लाल धागा (सूत) | जल का कलश | मौसमी फल (आम/लीची) |
| हल्दी, कुमकुम, सिंदूर | फूल और माला | पुड़ी और मिठाई (भोग) |
| हाथ का पंखा (बांस का) | अगरबत्ती और दीया | दान के लिए वस्त्र |
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स्मार्टपूजा पूरे भारत में परेशानी मुक्त वैदिक पंडित बुकिंग सेवाएं प्रदान करता है। चाहे आपको वट सावित्री व्रत पूजा, सत्यनारायण पूजा, या गृह प्रवेश के लिए पंडित की आवश्यकता हो, हम आपकी मदद करेंगे।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. 2026 में वट सावित्री पूजा कब है?
वट सावित्री अमावस्या 14 जून 2026 को है और वट पूर्णिमा 29 जून 2026 को है।
2. क्या कुंवारी लड़कियां यह व्रत रख सकती हैं?
हाँ, कुछ परंपराओं में, कुंवारी लड़कियां अच्छे पति और भविष्य के सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए यह उपवास रखती हैं।
3. बरगद के पेड़ की पूजा क्यों की जाती है?
बरगद का पेड़ त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, शिव) का प्रतीक है और यह अपनी लंबी उम्र और जीवन को सहारा देने की क्षमता के लिए जाना जाता है, जो इसे अखंड सौभाग्य का प्रतीक बनाता है।









