शनि प्रदोष 2026: सही तिथियां, पूजा विधि और शनि…

शनि प्रदोष 2026: सही तिथियां, पूजा विधि और शनि दोष से मुक्ति का अचूक उपाय
हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग माना गया है। जब यह पवित्र त्रयोदशी तिथि शनिवार के दिन पड़ती है, तो इसे शनि प्रदोष (Shani Pradosh) कहा जाता है।
वैदिक ज्योतिष में, भगवान शिव को शनि देव का गुरु माना जाता है। इसलिए, इस विशेष दिन भगवान शिव की आराधना करने से शनि ग्रह के क्रूर प्रभाव शांत हो जाते हैं। यह व्रत उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो शनि की साढ़े साती, ढैया, या महादशा के कष्टों से गुजर रहे हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से संतान प्राप्ति की बाधाएं दूर होती हैं और खोया हुआ धन वापस मिलता है।
🪐 दुर्लभ संयोग 2026:
वर्ष 2026 एक अनोखा साल है क्योंकि इसमें केवल 2 शनि प्रदोष तिथियां हैं। अन्य वर्षों के विपरीत, 2026 में अधिकांश त्रयोदशी तिथियां शनिवार को सूर्यास्त के समय नहीं मिल रही हैं। इसलिए, इन दो अवसरों को हाथ से न जाने दें!
भगवान शिव और शनि देव का संबंध
स्कंद पुराण के अनुसार, शनि देव ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए काशी में घोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें ग्रहों में सर्वश्रेष्ठ ‘न्यायाधीश’ का पद दिया था। इसी कारण, जो व्यक्ति प्रदोष काल में शिवजी का जलाभिषेक करता है, शनि देव उसे कभी कष्ट नहीं देते।
2026 में शनि प्रदोष की सही तिथियां
ये तिथियां दृक पंचांग (IST) के अनुसार सत्यापित हैं।
| दिनांक (Date) | पक्ष (Paksha) | पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल) |
|---|---|---|
| 14 फरवरी (शनिवार) | फाल्गुन कृष्ण पक्ष | 06:10 PM – 08:44 PM |
| 27 जून (शनिवार) | ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष | 07:23 PM – 09:23 PM |
⚠️ अस्वीकरण: ऊपर दिए गए मुहूर्त भारतीय मानक समय (IST) पर आधारित हैं। चूंकि प्रदोष काल स्थानीय सूर्यास्त पर निर्भर करता है, इसलिए अपने शहर के सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
शनि प्रदोष व्रत पूजन सामग्री
पूजा शुरू करने से पहले निम्नलिखित सामग्री एकत्रित कर लें:
| शिव पूजा: | गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा, मदार के फूल। |
| शनि पूजा: | काले तिल, सरसों का तेल, नीला वस्त्र, शमी पत्र, काली उड़द। |
| भोग: | मौसमी फल, खीर या हलवा। |
शनि प्रदोष व्रत विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)
इस व्रत को विधि-विधान से करने पर ही पूर्ण फल मिलता है। यहाँ संपूर्ण प्रक्रिया दी गई है:
- 🔹 प्रातः संकल्प: सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। दिन भर निराहार रहें या फलाहार लें। मन में “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते रहें।
- 🔹 प्रदोष काल पूजा: सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले दोबारा स्नान करें। धुले हुए वस्त्र धारण करें। प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) पूजा के लिए श्रेष्ठ है।
- 🔹 रुद्राभिषेक: शिवलिंग को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएं। इसके बाद गंगाजल अर्पित करें।
- 🔹 विशेष अर्पण: शिवलिंग पर काले तिल और शमी पत्र अवश्य चढ़ाएं। यह शनि दोष को काटने का सबसे बड़ा उपाय है।
- 🔹 आरती और क्षमा प्रार्थना: शिव चालीसा या शनि चालीसा का पाठ करें। अंत में कर्पूर से आरती करें और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
शनि प्रदोष व्रत कथा (प्राचीन पौराणिक कथा)
प्राचीन काल में एक नगर सेठ था, जो बहुत धनवान और दयालु था, लेकिन वह निःसंतान होने के कारण बहुत दुखी रहता था। एक दिन उसने तीर्थ यात्रा पर जाने का निश्चय किया। रास्ते में उसे एक तेजस्वी साधु मिले जो ध्यानमग्न थे। सेठ और उसकी पत्नी ने धैर्यपूर्वक उनकी सेवा की।
साधु ने प्रसन्न होकर उन्हें शनि प्रदोष व्रत करने का सुझाव दिया। सेठ और उसकी पत्नी ने घर लौटकर विधि-विधान से यह व्रत किया। शिव और शनि देव की कृपा से उन्हें एक सुंदर और तेजस्वी पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। तब से यह मान्यता है कि जो भी निःसंतान दंपत्ति शनि प्रदोष का व्रत रखते हैं, उनकी गोद कभी सूनी नहीं रहती।
शक्तिशाली मंत्र (Mantra for Chanting)
शिव पंचाक्षर मंत्र:
|| ॐ नमः शिवाय ||
शनि महामंत्र:
|| ॐ शं शनैश्चराय नमः ||
शनि दोष से मुक्ति के अचूक उपाय
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने प्रदोष काल में ही हलाहल विष का पान किया था। शनि प्रदोष के दिन किए गए उपाय कभी खाली नहीं जाते:
- पीपल पूजा: शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। यह साढ़े साती के प्रभाव को तुरंत कम करता है।
- छाया दान: एक कटोरी में सरसों का तेल लें, उसमें अपना चेहरा देखें और उसे किसी जरूरतमंद को दान कर दें या शनि मंदिर में रख दें।
- काले कुत्ते की सेवा: काले कुत्ते को रोटी खिलाने से शनि देव और काल भैरव दोनों प्रसन्न होते हैं।
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सम्पूर्ण प्रदोष व्रत 2026 कैलेंडर
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. 2026 में पहला शनि प्रदोष कब है?
2026 का पहला शनि प्रदोष व्रत 14 फरवरी, 2026 (शनिवार) को है।
2. शनि प्रदोष व्रत क्यों रखा जाता है?
यह व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने और शनि दोष (साढ़े साती/ढैया) के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए रखा जाता है। इससे संतान सुख, करियर में सफलता और धन की प्राप्ति होती है।









