माँ दुर्गा के 9 स्वरूप, महत्व और नवरात्रि 2026…

नवदुर्गा: माँ दुर्गा के 9 दिव्य स्वरूप और उनका महत्व
📅 नवरात्रि 2026: पूजा तिथियां
- घटस्थापना: 19 मार्च (गुरुवार)
- दुर्गा अष्टमी: 26 मार्च (गुरुवार)
- राम नवमी: 27 मार्च (शुक्रवार)
- प्रतिपदा: 11 अक्टूबर (रविवार)
- महा अष्टमी: 18 अक्टूबर (रविवार)
- विजयदशमी: 20 अक्टूबर (मंगलवार)
नवरात्रि केवल एक त्योहार नहीं है; यह आत्मा की शुद्धि की नौ रातों की यात्रा है। इस यात्रा में हमारा मार्गदर्शन करती हैं नवदुर्गा—माँ पार्वती के नौ विशिष्ट रूप।
देवी महात्म्य के अनुसार, माँ दुर्गा ने राक्षसों का नाश करने और भक्तों के कष्टों को दूर करने के लिए ये नौ रूप धारण किए थे। नवरात्रि में इनका विधि-विधान से पूजन करने से स्वास्थ्य, धन और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
1. माँ शैलपुत्री (प्रथम दिवस)

• चैत्र: 19 मार्च (गुरुवार)
• शरद: 11 अक्टूबर (रविवार)
कथा और स्वरूप
‘शैल’ का अर्थ है पर्वत और ‘पुत्री’ का अर्थ है बेटी। हिमालय राज की पुत्री होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। यह प्रकृति का साक्षात स्वरूप हैं।
स्वरूप: माँ नंदी बैल पर सवार हैं। उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल है।
धार्मिक महत्व
माँ शैलपुत्री ‘मूलाधार चक्र’ की स्वामिनी हैं। इनकी उपासना से जीवन में स्थिरता और दृढ़ता आती है।
🎨 रंग: पीला (Yellow)
2. माँ ब्रह्मचारिणी (द्वितीय दिवस)

• चैत्र: 20 मार्च (शुक्रवार)
• शरद: 12 अक्टूबर (सोमवार)
कथा और स्वरूप
‘ब्रह्म’ का अर्थ है तपस्या। भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए देवी ने कठोर तप किया था, इसलिए इन्हें ब्रह्मचारिणी कहा जाता है।
स्वरूप: माँ श्वेत वस्त्र धारण करती हैं। इनके एक हाथ में जप माला और दूसरे में कमंडल है।
🎨 रंग: हरा (Green)
3. माँ चंद्रघंटा (तृतीय दिवस)

• चैत्र: 21 मार्च (शनिवार)
• शरद: 13 अक्टूबर (मंगलवार)
कथा और स्वरूप
इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। यह दुष्टों के विनाश के लिए सदैव तत्पर रहती हैं।
स्वरूप: यह सिंह पर सवार हैं और इनके दस हाथ हैं, जिनमें अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं।
🎨 रंग: ग्रे (Grey)
4. माँ कूष्माण्डा (चतुर्थ दिवस)

• चैत्र: 22 मार्च (रविवार)
• शरद: 14 अक्टूबर (बुधवार)
कथा और स्वरूप
अपनी मंद मुस्कान से ‘अंड’ (ब्रह्मांड) की रचना करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा कहा जाता है। इनका निवास सूर्यलोक में है।
स्वरूप: इनकी आठ भुजाएं हैं (अष्टभुजा) और यह सिंह पर सवार हैं। इनके हाथ में अमृत कलश है।
🎨 रंग: नारंगी (Orange)
5. माँ स्कंदमाता (पंचम दिवस)

• चैत्र: 23 मार्च (सोमवार)
• शरद: 15 अक्टूबर (गुरुवार)
कथा और स्वरूप
भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। निःसंतान दंपत्तियों के लिए इनकी पूजा फलदायी है।
स्वरूप: यह कमल के आसन पर विराजमान हैं और इनकी गोद में बाल कार्तिकेय हैं।
🎨 रंग: सफेद (White)
6. माँ कात्यायनी (षष्ठ दिवस)

• चैत्र: 24 मार्च (मंगलवार)
• शरद: 16 अक्टूबर (शुक्रवार)
कथा और स्वरूप
महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया, इसलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा। विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए इनकी पूजा की जाती है।
🎨 रंग: लाल (Red)
7. माँ कालरात्रि (सप्तम दिवस)

• चैत्र: 25 मार्च (बुधवार)
• शरद: 17 अक्टूबर (शनिवार)
कथा और स्वरूप
दुष्टों का विनाश करने के लिए देवी ने यह भयानक रूप धारण किया। इनका रंग अंधकार की तरह काला है। यह शुभ फल देने वाली हैं, इसलिए इन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहते हैं। यह शनि दोष को दूर करती हैं।
🎨 रंग: नीला (Royal Blue)
8. माँ महागौरी (अष्टमी)

• चैत्र: 26 मार्च (गुरुवार)
• शरद: 18 अक्टूबर (रविवार)
कथा और स्वरूप
कठोर तपस्या के बाद जब देवी का रंग काला पड़ गया था, तब शिवजी ने गंगाजल से उन्हें धोकर गौर वर्ण (सफेद) कर दिया। इसलिए इन्हें महागौरी कहा जाता है। यह शांति और पवित्रता की प्रतीक हैं।
🎨 रंग: गुलाबी (Pink)
9. माँ सिद्धिदात्री (महानवमी)

• चैत्र: 27 मार्च (शुक्रवार)
• शरद: 19 अक्टूबर (सोमवार)
कथा और स्वरूप
यह सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। मान्यता है कि भगवान शिव ने भी इन्हीं की कृपा से अर्धनारीश्वर रूप प्राप्त किया था। यह कमल पर विराजमान हैं।
🎨 रंग: बैंगनी (Purple)
नवरात्रि साधना पूर्ण करें
नवरात्रि में चंडी होम और दुर्गा सप्तशती पाठ का आयोजन करने से व्रत का फल 1000 गुना बढ़ जाता है।









