माँ स्कंदमाता: नवरात्रि पांचवा दिन, पूजा विधि, मंत्र और…

माँ स्कंदमाता: नवरात्रि का पांचवा दिन, पूजा विधि और कथा
नवरात्रि के पांचवे दिन माँ दुर्गा के पंचम स्वरूप माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है। वे नवदुर्गा का ममतामयी रूप हैं।
भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। इनकी उपासना से भक्तों को संतान सुख और ज्ञान की प्राप्ति होती है। इन्हें ‘पद्मासना’ देवी भी कहा जाता है।
📅 2026 में माँ स्कंदमाता की पूजा कब है?
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तिथि: 23 मार्च 2026 (सोमवार)
तिथि: 15 अक्टूबर 2026 (गुरुवार)
माँ स्कंदमाता की कथा (Mythology)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, तारकासुर नामक राक्षस का अंत केवल भगवान शिव का पुत्र ही कर सकता था। तब माँ पार्वती ने अपने तेज से स्कंद (कार्तिकेय) को जन्म दिया।
माँ ने स्वयं कार्तिकेय को युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया और देवताओं का सेनापति बनाया। स्कंदमाता अपने भक्तों को मोक्ष प्रदान करती हैं। ऐसा माना जाता है कि इनकी पूजा करने से मूर्ख व्यक्ति भी ज्ञानी हो जाता है (जैसे कालिदास)।
- वाहन: माँ खूंखार सिंह (शेर) पर सवार हैं।
- भुजाएं: इनकी चार भुजाएं हैं। दो हाथों में कमल, एक में बाल कार्तिकेय और चौथा हाथ वरद मुद्रा में है।
- आसन: ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं।
पूजा विधि (Navratri Day 5)
माँ स्कंदमाता की पूजा से ‘विशुद्धि चक्र’ जाग्रत होता है। पूजा की विधि इस प्रकार है:
पूजा के समय माँ के साथ-साथ भगवान कार्तिकेय का भी आवाहन करें।
माँ को केला (Banana) अत्यंत प्रिय है। केले का भोग लगाने से शरीर निरोगी रहता है।
माँ को पीले या लाल फूल अर्पित करें। कमल का फूल उन्हें विशेष प्रिय है।
माँ को श्वेत (सफेद) या पीले वस्त्र अर्पित करें जो पवित्रता का प्रतीक हैं।
🕉️ माँ स्कंदमाता मंत्र
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
“सिंह पर सवार और हाथों में कमल धारण करने वाली यशस्विनी स्कंदमाता देवी मेरे लिए सदा शुभ फलदायी हों।”
🎨 पांचवे दिन का शुभ रंग: पीला (Yellow) या सफेद
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निष्कर्ष
माँ स्कंदमाता वात्सल्य और शक्ति का संगम हैं। उनकी आराधना से जीवन में प्रेम, ज्ञान और समृद्धि आती है। SmartPuja के साथ अपनी नवरात्रि साधना को पवित्र और सफल बनाएं।









