माँ सिद्धिदात्री: नवरात्रि नवमी, पूजा विधि, मंत्र और कथा…

माँ सिद्धिदात्री: नवरात्रि का नौवां दिन, पूजा विधि और कथा
नवरात्रि के अंतिम दिन यानी महानवमी को माँ दुर्गा के नौवें स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। वे नवदुर्गा की सर्वोच्च शक्ति हैं।
इनके नाम का अर्थ है: ‘सिद्धि’ (अलौकिक शक्ति) और ‘दात्री’ (देने वाली)। ये अपने भक्तों को आठ प्रकार की सिद्धियां (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व) प्रदान करती हैं।
📅 2026 में माँ सिद्धिदात्री की पूजा कब है?
अन्य सभी त्योहारों की जानकारी के लिए हमारा हिंदू त्योहार कैलेंडर 2026 देखें।
तिथि: 27 मार्च 2026 (शुक्रवार)
विशेष: राम नवमी
तिथि: 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार)
विशेष: महानवमी
अर्धनारीश्वर का रहस्य (Mythology)
देवी पुराण के अनुसार, ब्रह्मांड के आरंभ में, भगवान शिव ने सृष्टि की रचना के लिए आदि-पराशक्ति की उपासना की। तब देवी ने शिवजी के वाम अंग (बाएं भाग) से प्रकट होकर उन्हें सभी सिद्धियां प्रदान कीं।
देवी के इस संयोग के कारण भगवान शिव अर्धनारीश्वर कहलाए। माँ सिद्धिदात्री न केवल मनुष्यों द्वारा, बल्कि देव, गंधर्व, यक्ष, असुर और सिद्धों द्वारा भी पूजी जाती हैं।
- आसन: माँ कमल के फूल पर विराजमान हैं, हालांकि वे सिंह पर भी सवार होती हैं।
- भुजाएं: इनकी चार भुजाएं हैं। दाहिने हाथों में गदा और चक्र है। बाएं हाथों में कमल और शंख सुशोभित है।
- स्वभाव: यह अत्यंत सौम्य और प्रसन्न मुद्रा में रहती हैं।
पूजा विधि (Mahanavami)
महानवमी नवरात्रि का समापन दिवस है। इस दिन हवन और कन्या पूजन का विशेष विधान है।
माँ की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं और नए वस्त्र व आभूषण पहनाएं।
माँ को तिल (Sesame) प्रिय है। तिल या उससे बनी मिठाई और अनार का भोग लगाएं।
9 कन्याओं (कुमारियों) को देवी का रूप मानकर पूजें। उन्हें हलवा, पूरी और उपहार दें।
नवरात्रि व्रत के समापन के लिए हवन (होमा) करें और माँ से क्षमा प्रार्थना करें।
🕉️ माँ सिद्धिदात्री मंत्र
सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
“सिद्ध, गंधर्व, यक्ष, असुर और देवताओं द्वारा पूजी जाने वाली माँ सिद्धिदात्री, हमें आठों सिद्धियां प्रदान करें।”
🎨 नौवें दिन का शुभ रंग: बैंगनी (Purple)
महानवमी पूजा और हवन बुक करें
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निष्कर्ष
माँ सिद्धिदात्री मानव जीवन के अंतिम लक्ष्य—मोक्ष और पूर्णता—की प्रतीक हैं। महानवमी पर उनकी पूजा करने से नवरात्रि के नौ दिनों की तपस्या का फल मिलता है। SmartPuja के साथ इस पावन पर्व को विधि-विधान से मनाएं।









