माँ ब्रह्मचारिणी: नवरात्रि दूसरा दिन, पूजा विधि, मंत्र और…

माँ ब्रह्मचारिणी: नवरात्रि का दूसरा दिन, पूजा विधि और कथा
नवरात्रि के दूसरे दिन माँ दुर्गा के ‘तपश्विनी’ रूप यानी माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। वे नवदुर्गा (नौ रूपों) में दूसरी शक्ति हैं।
‘ब्रह्म’ का अर्थ है तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ है आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ- तप का आचरण करने वाली देवी। इनकी उपासना से व्यक्ति में संयम, त्याग और वैराग्य की वृद्धि होती है।
📅 2026 में माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा कब है?
अन्य सभी त्योहारों की जानकारी के लिए हमारा हिंदू त्योहार कैलेंडर 2026 देखें।
तिथि: 20 मार्च 2026 (शुक्रवार)
तिथि: 12 अक्टूबर 2026 (सोमवार)
माँ ब्रह्मचारिणी की कथा (Mythology)
अपने पूर्व जन्म में जब वे हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्मीं, तब नारद जी के उपदेश से उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए अत्यंत कठिन तपस्या की। इस कठिन तपस्या के कारण ही इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा।
एक हजार वर्ष तक उन्होंने केवल फल-फूल खाए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया। अंत में उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिया और निर्जल और निराहार रहकर तपस्या की। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण इनका नाम ‘अपर्णा’ भी पड़ गया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें मनोकामना पूर्ण होने का वरदान दिया।
- वस्त्र: माँ श्वेत (सफेद) वस्त्र धारण करती हैं, जो पवित्रता का प्रतीक है।
- हाथ: इनके दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है।
- भाव: इनका स्वरूप अत्यंत शांत और सौम्य है।
पूजा विधि (Navratri Day 2)
माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा से ‘स्वाधिष्ठान चक्र’ जागृत होता है। पूजा की विधि इस प्रकार है:
स्नान के बाद माँ की मूर्ति को दूध, दही, और शहद से स्नान कराएं।
माँ को चमेली और गुड़हल के फूल अत्यंत प्रिय हैं। उन्हें पुष्प अर्पित करें।
माँ ब्रह्मचारिणी को चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग लगाएं। वे सादगी पसंद करती हैं।
अंत में कपूर जलाकर माँ की आरती करें और मंत्रों का जाप करें।
🕉️ माँ ब्रह्मचारिणी मंत्र
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
“जिसके एक हाथ में अक्षमाला और दूसरे में कमंडल है, वह सर्वोत्तम ब्रह्मचारिणी देवी मुझ पर कृपा करें।”
🎨 दूसरे दिन का शुभ रंग: हरा (Green)
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निष्कर्ष
माँ ब्रह्मचारिणी हमें सिखाती हैं कि जीवन में कठिन परिस्थितियों में भी घबराना नहीं चाहिए और अपने लक्ष्य (धर्म) के प्रति अडिग रहना चाहिए। SmartPuja के साथ अपनी नवरात्रि साधना को सफल बनाएं।









