हिंदू विवाह संस्कार: संपूर्ण पूजा विधि एवं 2026 के शुभ मुहूर्त

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हिंदू विवाह संस्कार: संपूर्ण पूजा विधि एवं 2026 के…

 

⏳ 2026 के मुख्य विवाह मुहूर्त (फरवरी और मई) तेजी से बुक हो रहे हैं!

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हिंदू विवाह संस्कार में सात फेरे (सप्तपदी) लेते हुए वर-वधू

सनातन धर्म का सबसे पवित्र संस्कार

हिंदू विवाह संस्कार: संपूर्ण पूजा विधि, सात फेरे एवं 2026 के शुभ मुहूर्त

अंतिम अपडेट: | वरिष्ठ वैदिक आचार्यों द्वारा सत्यापित (Verified)

सनातन वैदिक परंपरा में, हिंदू विवाह संस्कार (Vivah Sanskar) केवल एक कानूनी या सामाजिक समझौता नहीं है; यह दो आत्माओं का गहरा आध्यात्मिक मिलन है। यदि आप हिंदू विवाह संस्कार की वैदिक विधि को समझना चाहते हैं, शादी की पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट ढूँढ रहे हैं, एक प्रामाणिक पंडित की तलाश में हैं, या 2026 के विवाह मुहूर्त का कैलेंडर (PDF) डाउनलोड करना चाहते हैं, तो यह संपूर्ण मार्गदर्शिका आपके लिए है।

हिंदू विवाह संस्कार का शास्त्रीय महत्व

एक भारतीय हिंदू विवाह संस्कार की भव्यता को सही मायने में सराहने के लिए, हमें इसकी जड़ों को समझना होगा। हिंदू विवाह संस्कार की संरचना आश्वलायन गृह्यसूत्र, पारस्कर गृह्यसूत्र और मनुस्मृति जैसे प्राचीन धर्मशास्त्रों में गहराई से रची-बसी है।

इन धर्मशास्त्रों के अनुसार, हिंदू विवाह संस्कार मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संक्रमण है। यह ‘ब्रह्मचर्य’ (छात्र जीवन) से ‘गृहस्थ आश्रम’ (पारिवारिक जीवन) में प्रवेश का प्रतीक है। वेदों के अनुसार, विवाह का उद्देश्य केवल भौतिक सुख नहीं है, बल्कि तीन आवश्यक ब्रह्मांडीय कर्तव्यों को पूरा करना है:

  • धर्म (Dharma): धार्मिक कर्तव्यों और यज्ञों को एक साथ संपन्न करना। वैदिक मान्यताओं के अनुसार, एक अकेला व्यक्ति पूर्ण यज्ञ नहीं कर सकता; इसके लिए पत्नी (सहधर्मिणी) की उपस्थिति अनिवार्य है।
  • प्रजा (Praja): परिवार के वंश को आगे बढ़ाने और पूर्वजों के ऋण (पितृ ऋण) को चुकाने के लिए स्वस्थ और संस्कारी संतान की उत्पत्ति।
  • रति (Rati): धर्म की सीमाओं के भीतर आपसी प्रेम, भावनात्मक समर्थन और शारीरिक सुख की प्राप्ति।

हिंदू विवाह संस्कार की पूजा विधि (Step-by-Step Rituals)

हालाँकि कश्मीर की वादियों से लेकर कन्याकुमारी के तटों तक शादी की रस्मों में भारी विविधता है, लेकिन मूल वैदिक ढांचा एक समान रहता है। पवित्र अग्नि सभी प्रतिज्ञाओं की अंतिम दिव्य साक्षी (गवाह) होती है। यहाँ एक पारंपरिक हिंदू विवाह समारोह का क्रमबद्ध प्रवाह दिया गया है, जिसे स्मार्टपूजा के सत्यापित पंडित जी पूरी सटीकता के साथ संपन्न कराते हैं:

1. गौरी-गणेश पूजा एवं पुण्याहवाचन

कोई भी शुभ हिंदू कार्य भगवान गणेश (विघ्नहर्ता) के आह्वान के बिना शुरू नहीं होता। पंडित जी यह सुनिश्चित करने के लिए मंत्रोच्चार करते हैं कि विवाह बिना किसी बाधा के पूरा हो। इसके तुरंत बाद पुण्याहवाचन होता है, जहाँ पवित्र जल और आम के पत्तों से भरे कलश का उपयोग मंडप, पूजा सामग्री और जोड़े के मन को शुद्ध करने के लिए किया जाता है।

2. वर आगमन एवं मधुपर्क

जब दूल्हा मंडप में आता है, तो उसे केवल एक मनुष्य नहीं, बल्कि भगवान विष्णु के स्वरूप के रूप में देखा जाता है। वधू के पिता उनके पैर धोकर स्वागत करते हैं और उन्हें सम्मानपूर्वक आसन ग्रहण कराते हैं। इसके बाद उन्हें मधुपर्क—शहद, दही और घी का एक अत्यधिक प्रतीकात्मक मिश्रण—पेश किया जाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि वैवाहिक जीवन में वर की वाणी और कर्म हमेशा मधुर और पुष्टिकर रहेंगे।

3. कन्यादान (सबसे बड़ा महादान)

हिंदू धर्म में कन्यादान को एक गृहस्थ द्वारा अपने जीवनकाल में किए जा सकने वाले ‘दान’ का सबसे उच्च रूप माना जाता है। वधू के पिता अपनी बेटी का दाहिना हाथ वर के दाहिने हाथ में रखते हैं और पवित्र जल अर्पित करते हैं। वह अपनी सबसे कीमती बेटी को सौंपते हुए वर से यह वचन लेते हैं कि वह धर्म, अर्थ और काम की अपनी खोज में कभी भी कन्या का साथ नहीं छोड़ेगा।

4. पाणिग्रहण (हाथ थामना)

दूल्हा मजबूती से दुल्हन का हाथ थामकर उसे स्वीकार करता है। ऐसा करते समय, वह जीवन भर सुरक्षा का वादा करते हुए वैदिक मंत्र पढ़ता है: “मैं तुम्हारी प्रसन्नता के लिए तुम्हारा हाथ थामता हूँ, ताकि तुम मेरे (अपने पति) साथ वृद्धावस्था तक जीवित रहो। देवताओं ने तुम्हें मेरे गृहस्थ धर्म को पूरा करने के लिए मुझे सौंपा है।”

5. अग्नि प्रदक्षिणा (मंगल फेरे)

वर-वधू पवित्र अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करते हैं, और उनके वस्त्र एक साथ बंधे होते हैं (गठबंधन), जो उनकी आत्माओं के मिलन का प्रतीक है। आमतौर पर चार फेरे लिए जाते हैं। पहले तीन फेरों का नेतृत्व वर करता है, जो धर्म, अर्थ और काम प्रदान करने में उसके नेतृत्व का प्रतीक है। अंतिम फेरे का नेतृत्व वधू करती है, जो परिवार को मोक्ष (आध्यात्मिक मुक्ति) की ओर ले जाने में उसके नेतृत्व का प्रतीक है।

6. लाजा होम (धान का लावा अर्पित करना)

दुल्हन का भाई दुल्हन के हाथों में धान का लावा (Laja) रखता है। दूल्हा अपना हाथ दुल्हन के हाथों के नीचे रखता है, और दोनों मिलकर इसे प्रज्वलित पवित्र अग्नि में अर्पित करते हैं। यह सुंदर अनुष्ठान यम (मृत्यु के देवता) से प्रार्थना का प्रतीक है कि वे दूल्हे को लंबा और स्वस्थ जीवन दें, यह सुनिश्चित करते हुए कि दुल्हन कभी विधवा न हो।

7. सप्तपदी (सात पवित्र वचन)

यह एक हिंदू विवाह संस्कार का कानूनी और आध्यात्मिक चरम (Climax) है। जोड़ा उत्तर दिशा की ओर एक साथ सात कदम चलता है और सात विशिष्ट प्रतिज्ञाएं लेता है। (हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार, विवाह केवल सातवें कदम के पूरा होने के बाद ही कानूनी रूप से बाध्यकारी माना जाता है)।

  • पहला कदम: भोजन, पोषण और स्वास्थ्य के लिए।
  • दूसरा कदम: शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति के लिए।
  • तीसरा कदम: धन, समृद्धि और धर्मपूर्वक जीवन यापन के लिए।
  • चौथा कदम: आपसी खुशी, विश्वास और ज्ञान के लिए।
  • पांचवां कदम: स्वस्थ और संस्कारी संतान (प्रजा) के लिए।
  • छठा कदम: शांति और लंबी उम्र के लिए।
  • सातवां कदम: शाश्वत मित्रता, वफादारी और आजीवन साथ निभाने के लिए।

8. सिंदूर दान एवं मंगलसूत्र

हिंदू विवाह संस्कार को अंतिम रूप देने के लिए, दूल्हा दुल्हन की मांग में चमकीला लाल सिंदूर भरता है और उसके गले में मंगलसूत्र (पवित्र स्वर्ण सूत्र) बांधता है। ये एक विवाहित महिला के रूप में उसकी नई स्थिति और उसके नए घर की देवी (गृहलक्ष्मी) के रूप में प्रतिष्ठित होने के भौतिक प्रतीक हैं।

क्षेत्रीय भिन्नताएं: एक प्लेटफ़ॉर्म, सभी परंपराएं

भारत विविधताओं का देश है। एक तमिल ब्राह्मण विवाह की रस्में एक पंजाबी विवाह से काफी अलग होती हैं। स्मार्टपूजा में, हम केवल एक सामान्य पंडित नहीं भेजते; हम आपकी समुदाय-विशिष्ट (Community-Specific) परंपराओं को जानने वाले पंडित जी प्रदान करते हैं:

क्षेत्र / परंपरा विशेष रस्में जो हम कराते हैं
उत्तर भारतीय (यूपी/बिहार) जयमाला, सात फेरे, सिंदूर दान, चुमावन, परिछावन
दक्षिण भारतीय (तमिल/तेलुगु) काशी यात्रा, ऊंजल, मांगल्य धारणम, तलमब्रालु
महाराष्ट्रीयन अंतरपाट, मंगलाष्टक, लक्ष्मी नारायण पूजा, सप्तपदी
बंगाली सात पाक, शुभो दृष्टि, माला बोदोल, सिंदूर दान

🌸 2026 के शुभ विवाह मुहूर्त 🌸

ऊपर बताई गई रस्मों का अधिकतम ब्रह्मांडीय लाभ प्राप्त करने के लिए, उन्हें शुभ तिथि और नक्षत्र में किया जाना चाहिए। नीचे वैदिक पंचांग (Drik Panchang) पर आधारित 2026 के हिंदू विवाह संस्कार मुहूर्तों की पूरी सूची दी गई है।

महीना (2026) कुल शुभ तिथियां
जनवरी 4 तिथियां
फरवरी 10 तिथियां (मुख्य सीजन)
मार्च 6 तिथियां
अप्रैल 5 तिथियां
मई 5 तिथियां (मुख्य सीजन)
जून – जुलाई जून में 1 विंडो, जुलाई में 4
अगस्त – अक्टूबर 0 तिथियां (चातुर्मास)
नवंबर – दिसंबर 11 तिथियां
अति महत्वपूर्ण

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इसे “सामान्य तारीख” के भरोसे न छोड़ें।

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जनवरी 2026 (January)

दिनांक (Date) दिन (Day) नक्षत्र (Nakshatra)
14 जनवरी बुधवार अनुराधा
23 जनवरी शुक्रवार उत्तराभाद्रपद
25 जनवरी रविवार रेवती
28 जनवरी बुधवार रोहिणी

फरवरी 2026 (मुख्य सीजन)

दिनांक (Date) दिन (Day) नक्षत्र (Nakshatra)
5-6 फरवरी गुरुवार-शुक्रवार उत्तरा फाल्गुनी, हस्त
8, 10 फरवरी रविवार, मंगलवार स्वाति, अनुराधा
12, 14 फरवरी गुरुवार, शनिवार मूल, उत्तराषाढ़ा
19-21 फरवरी गुरुवार-शनिवार उत्तराभाद्रपद, रेवती
24-26 फरवरी मंगलवार-गुरुवार रोहिणी, मृगशिरा

मार्च 2026 (March)

दिनांक (Date) दिन (Day) नक्षत्र (Nakshatra)
1, 3, 4 मार्च रविवार-बुधवार मघा, फाल्गुनी
7-9 मार्च शनिवार-सोमवार स्वाति, अनुराधा
11-12 मार्च बुधवार-गुरुवार मूल

अप्रैल 2026 (April)

दिनांक (Date) दिन (Day) नक्षत्र (Nakshatra)
15 अप्रैल बुधवार उत्तराभाद्रपद
20-21 अप्रैल सोमवार-मंगलवार रोहिणी, मृगशिरा
25-29 अप्रैल शनिवार-बुधवार मघा, फाल्गुनी, हस्त

मई 2026 (May)

दिनांक (Date) दिन (Day) नक्षत्र (Nakshatra)
1, 3 मई शुक्रवार, रविवार स्वाति, अनुराधा
5-8 मई मंगलवार-शुक्रवार मूल, उत्तराषाढ़ा
13-14 मई बुधवार-गुरुवार उत्तराभाद्रपद, रेवती

जून-जुलाई 2026

दिनांक (Date) दिन (Day) नक्षत्र (Nakshatra)
21-29 जून विभिन्न दिन उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, मूल
1, 6, 7, 11 जुलाई विभिन्न दिन उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, रोहिणी

🚫 चातुर्मास विश्राम (अगस्त से अक्टूबर 2026)

अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में भगवान विष्णु के ‘योग निद्रा’ में होने के कारण कोई भी हिंदू विवाह संस्कार शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है। यह अवधि विवाह की योजना बनाने या गृह प्रवेश पूजा के लिए आदर्श है।

नवंबर-दिसंबर 2026

दिनांक (Date) नक्षत्र (Nakshatra)
21, 24, 25, 26 नवंबर रेवती, रोहिणी, मृगशिरा
2, 3, 4, 5, 6, 11, 12 दिसंबर फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, मूल

विवाह की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन

अपनी शादी / हिंदू विवाह संस्कार की तैयारियों को तनावमुक्त बनाने के लिए हमारी इन विशेषज्ञ सूचियों को पढ़ें:

शादी के लिए वैदिक पंडित ऑनलाइन कैसे बुक करें?

  1. विजिट करें: स्मार्टपूजा हिंदू विवाह संस्कार सेवा पेज पर जाएं।
  2. विवरण दें: अपना शहर, विवाह की तारीख और अपनी परंपरा (जैसे हिंदी, कन्नड़, तमिल, मराठी) साझा करें।
  3. परामर्श: हमारी टीम आपसे विशिष्ट रस्मों (लग्न की अवधि, हवन आदि) पर चर्चा करेगी।
  4. बुकिंग: एक टोकन एडवांस देकर पंडित जी को बुक करें। संपूर्ण पूजा सामग्री (Samagri) हम स्वयं लाएंगे!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q: क्या 2026 की ये विवाह तिथियां भारत के सभी शहरों पर लागू होती हैं?

A: ये तिथियां मानक हिंदू पंचांग पर आधारित हैं। हालाँकि, सूर्योदय के समय में अंतर के कारण सटीक लग्न (Ascendant) शहर दर शहर अलग-अलग होता है। इसलिए विवाह का स्थान तय करने से पहले ज्योतिषी से परामर्श की सिफारिश की जाती है।

Q: क्या हम चातुर्मास के दौरान कोर्ट मैरिज (Court Marriage) कर सकते हैं?

A: हाँ, कानूनी रूप से कोर्ट मैरिज करने की अनुमति है। हालाँकि, इस अवधि के दौरान पवित्र अग्नि के चारों ओर पारंपरिक वैदिक अनुष्ठान और फेरे वर्जित माने जाते हैं।

Q: क्या स्मार्टपूजा डेस्टिनेशन वेडिंग (Destination Wedding) के लिए पंडित प्रदान करता है?

A: बिल्कुल! स्मार्टपूजा के अनुभवी पंडित पूरे भारत में डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए यात्रा करते हैं। इसके लिए कृपया हमें पहले से सूचित करें ताकि हम उनकी तिथियां ब्लॉक कर सकें।

Q: 2026 में शादी के लिए सबसे लोकप्रिय महीने कौन से हैं?

A: 2026 में शादियों के लिए फरवरी और मई सबसे लोकप्रिय महीने हैं, क्योंकि इन महीनों में ग्रहों की स्थिति सबसे अनुकूल है और सर्वाधिक शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं।

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Nishchay Chaturvedi