गंगा सप्तमी 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, जह्नु सप्तमी…

गंगा सप्तमी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
📅 अंतिम अपडेट: अप्रैल 2026 | वैदिक पंचांग के अनुसार सत्यापित
गंगा सप्तमी, जिसे गंगा जयंती या जह्नु सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू कैलेंडर में एक अत्यंत पवित्र दिन है। गंगा दशहरा (जो उनके पृथ्वी पर अवतरण का प्रतीक है) के विपरीत, यह शुभ दिन माँ गंगा के पुनर्जन्म का प्रतीक है।
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को पड़ने वाले इस दिन के बारे में मान्यता है कि यह गंभीर से गंभीर पापों को धोने और पूर्वजों को मोक्ष प्रदान करने की शक्ति रखता है। जो भक्त इस दिन पवित्र नदी में स्नान करते हैं और दीपदान करते हैं, उन पर भगवान शिव और माँ गंगा की विशेष कृपा होती है।
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गंगा सप्तमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में, यह पर्व गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। माँ गंगा की पूजा के लिए सबसे शुभ समय मध्याह्न (दोपहर) काल है।
| अवसर (Event) | दिनांक और समय (IST) |
|---|---|
| गंगा सप्तमी तिथि | 23 अप्रैल, 2026 (गुरुवार) |
| मध्याह्न मुहूर्त | सुबह 10:58 से दोपहर 01:36 बजे तक |
| सप्तमी तिथि आरंभ | 23 अप्रैल को सुबह 03:55 बजे |
| सप्तमी तिथि समाप्त | 24 अप्रैल को सुबह 05:42 बजे |
*नोट: ये समय नई दिल्ली IST पर आधारित हैं। अपने शहर के सटीक समय के लिए स्मार्टपूजा पंडित से परामर्श करें।
प्रमुख शहरों में गंगा सप्तमी मुहूर्त
यद्यपि मध्याह्न मुहूर्त आम तौर पर मानक होता है, लेकिन स्थानीय सूर्योदय के आधार पर इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है:
- दिल्ली: 10:58 AM – 01:36 PM
- मुंबई: 11:15 AM – 01:45 PM
- बैंगलोर: 10:55 AM – 01:30 PM
- कोलकाता: 10:30 AM – 01:10 PM
इसे “जह्नु सप्तमी” क्यों कहा जाता है? (पौराणिक कथा)
गंगा सप्तमी की कथा गंगा दशहरा से अलग और बहुत रोचक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार:
जब माँ गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं, तो उनके तीव्र वेग ने जह्नु ऋषि के आश्रम को नष्ट करने की धमकी दी। इस विघ्न से क्रोधित होकर, ऋषि ने पूरी नदी को पी लिया (आचमन कर लिया)।
राजा भगीरथ और अन्य देवताओं की प्रार्थना पर, जह्नु ऋषि शांत हुए और वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी को अपने कान के माध्यम से गंगा को मुक्त कर दिया। इस प्रकार, गंगा का पुनर्जन्म जह्नु ऋषि की पुत्री के रूप में हुआ और उन्हें जाह्नवी के नाम से जाना जाने लगा। यह दिन उनके पुनर्जन्म और मानवता के कल्याण के लिए उनकी वापसी का उत्सव है।
अंतर: गंगा सप्तमी बनाम गंगा दशहरा
कई भक्त इन दो तिथियों में भ्रमित हो जाते हैं। यहाँ स्पष्ट अंतर है:
- गंगा सप्तमी: यह वह दिन है जब गंगा का जह्नु ऋषि के कान से पुनर्जन्म (मुक्ति) हुआ था।
- गंगा दशहरा: यह वह दिन है जब गंगा मूल रूप से स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं।
5 शक्तिशाली पूजा अनुष्ठान (Puja Vidhi)
धन, स्वास्थ्य और मोक्ष प्राप्ति के लिए इन चरणों का पालन करें:
- पवित्र स्नान: सूर्योदय से पहले उठें। गंगा नदी में स्नान करें या घर पर नहाने के पानी में गंगा जल मिलाएं।
- संकल्प: हाथ में जल और फूल लेकर अपने पूर्वजों की शांति के लिए पूजा करने का संकल्प लें।
- पूजा: माँ गंगा की मूर्ति (या उनका प्रतिनिधित्व करने वाले कलश) की स्थापना करें। सफेद फूल, चंदन और फल अर्पित करें।
- दीपदान: शाम को नदी या जलाशय में एक जलता हुआ मिट्टी का दीपक (दीया) प्रवाहित करें। यह पूर्वजों की आत्माओं को स्वर्ग की ओर मार्गदर्शन करता है।
- शिव पूजा: चूंकि गंगा शिव की जटाओं से बहती हैं, इसलिए भगवान शिव की पूजा अनिवार्य है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
🪔 गंगा सप्तमी का दिव्य मंत्र
“गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु”
अर्थ: हे पवित्र नदियों गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी, कृपया इस जल में उपस्थित हों।
राशि अनुसार दान (Zodiac Donations)
इस दिन अपनी राशि के अनुसार दान करके अपना भाग्य प्रबल करें:
🔥 अग्नि तत्व (मेष, सिंह, धनु)
गेहूं, गुड़ या तांबे के बर्तन का दान करें।
🌍 पृथ्वी तत्व (वृषभ, कन्या, मकर)
वस्त्र, मूंग दाल या गाय को चारा दान करें।
💧 जल/वायु तत्व (अन्य राशियां)
चावल, चीनी, दूध या सफेद फूलों का दान करें।
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